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बातें जो रह गई याद

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अजब बिमारी....................

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क्‍या इस के लक्षण जानना चाहेंगे …… तो कृपया पढ़ें 

 

भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि इस बीमारी का कोई नाम तो है।

 

हॉं अब तो मै कुछ सही महसूस कर रहा हूं, जब की इस से निजात नहीं मिली।

 

अभी कुछ महीनों से मै कुछ परेशान सा था, स्‍वयं अपने आप से लड़ रहा था। जाने मुझे क्‍या हो गया ?

 

कई डॉक्‍टरों को दिखाने के बाद मर्ज जो पता चला उस का नाम बड़ा ही अजीब बताया – A.A.A.D.D. (Age Activated Attention Deficit Disorder) यानि बढ़ती उम्र के कारण भूलने की बिमारी।

 

आप स्‍वंय देखिए यह अपना रूप कैसे दिखाती है……

 

सुबह बालकनी में बैठा अखबार पढ़ रहा था और चाय का मजा लेते हुए अखबार की खबरों का मजा ले रहा था। अखबार पढ़ते-पढ़ते ही ख्‍याल आया की गमलों में पानी दें दूं, चश्‍मा वहीं कुर्सी पर रखा उस पर अखबार को पटक मै उठ जाता हूं।

 

नल पर पाईप लगाया और नल चालू कर दिया, किन्‍तु देखा के मनी प्‍लांट की शाखाऐं कुछ ज्‍यादा ही बड़ी हो गई हैं और उन्‍हें काटने के विचार से मै मुड कर अंदर जाकर अपने औजारों के बक्‍सें में से कटर निकालता हूं और बाहर आने के लिए जैसे ही चलता हूं तो देखता हूं कलैन्‍डर पर अभी पुराना ही महीना चल रहा है।

 

मै कलैन्‍डर को ठीक करने लगता हूं तो मेज पर मुझे पानी का बिल पड़ा दिखता है जिस की आज आखरी तारीख है मै मेज की दराज से अपनी चेकबुक निकालता हूं और और एक चेक लिखने के लिए अपना चश्‍मा खोजने लगता हूं चश्‍में की खोज में मै अपने बैडरूम में जाता हूं तो देखता हूं पलंग पर कबंल बे-तरतीब फैला पड़ा है 

 

मै कंबल को तैह करने लगता हूं, तभी हमारी धर्मपत्‍नी जी की आवाज आती है दूध वाला अभी तक दूध नहीं दे कर गया है आप जाकर ले आएं और हां घर पर आलू भी नहीं है और कुछ सब्‍जी भी लेते आंए।

 

मै घर से थैला ले बाजार को निकलता हूं, पहले दूध लेता हूं फिर आलू और घर पहूंचता हूं, सामान रसोई में रख कर घड़ी पर नजर डालता हूं तो समय 9.00 बज चुके थे मुझे दफ्तर को देर हो गई थी जल्‍दी से नहाने के लिए तैयारी करने लगता हूं और तौलिए की खोज में बालकनी में जाता हूं तो देखता हूं के नल पर जो पाईप मै लगा कर छोड आया था वह अब टंकी खाली होने के बाद बंद हो चुका था। बलकनी बिना धुलाई के ही साफ नजर आ रही थी।

 

मै जल्‍दी में नहाने घुस जाता हूं तो देख नल में पानी नहीं है, बाल्‍टी में बचे खुचे पानी से केवल मुह हाथ धोकर मै तैयार होकर नाश्‍ता बिना किए दफ्तर को भागता हूं तो धर्मपत्‍नी कहती है आप से कुछ सब्‍जी लाने को कहा था केवल आलू ही लेकर आए हैं। मै दफ्तर के लिए लेट हो रहा था सो बोला की तुम ही ले आना।

 

आज मै दफ्तर के लिए आधा घंटा लेट था, क्‍यों के आज बड़े साहब ने 10 बजे एक मीटिंग बुलाई थी और मुझे भी कुछ फाईलों सहित समय पर उस में शामिल होना था। जल्‍दी से स्‍कूटर उठा मैं दफ्तर के लिए निकल पड़ता हूं। 

 

दफ्तर पहुंच कर जब मीटिंग की तैयारी के लिए चश्‍मा निकालने लगता हूं तो देखता हूं, मै तो आज चश्‍मा लाया ही नही साथ ही पेन और मोबाईल भी लाना भूल गया। अब मीटिंग में कैसे जाऊं,

 

माथा पकड मै कुर्सी पर बैठ जाता हूं और सोचने लगता हूं कि मुझे यह क्‍या होता जा रहा है?

 

चश्‍मा घर पर छोड़ आया, नल खुला छोड दिया टंकी खाली हो गई,

 

पानी का बिल भरना भूल गया, सब्‍जी वाले से केवल आलू लेकर चला आया,

 

मेज पर लगा हुआ लंच-बोक्‍स घर पर छोड आया पैन और मोबाईल भी भूल आया, दफ्तर देर से पहुंचा आखिर क्‍यों?

 

मै सोचने लगा कि, मै तो निष्‍फल रहा, पर सुबह 5.00 बजे से तो मै व्‍यस्‍त था।

 

यह एक गंभीर समस्‍या है मुझे इस विषय में कुछ सोचना पडेगा।

 

फिर मुझे ध्‍यान आया के भई दिवाली के बाद से तो मै जागरण जंकशन से भी नही मिला

 

यह हंसने की बात नहीं है – यदि आप इस बिमारी से अभी बचे हुए है तो बहुत जल्‍द आप का भी यही हाल होने वाला है।

 

-दीपकजोशी63



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55 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amit Dehati के द्वारा
December 17, 2010

जोशी जी नमस्कार , वाह जोशी जी बिल्कुल सही लिखा आपने और हम सब उसी क़तर में खड़े है . आपका ब्लॉग पहली बार पढ़ रहा हूँ . बहुत ही सहजता से इतनी बड़ी बात को लोगों के सामने रख देये है . लेकिन फिर भी …… आपके खिदमत में दो शब्द…. भूलने की बिमारी सी शायद लग गई मुझको . मगर महबूब की आहट का, अंदाजा याद है अबतक . शुक्रिया !

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    December 19, 2010

    अमित जी बहुत ही पारखी नजर रखते है, बहुत खूब कहा है आपने – भूलने की बिमारी सी शायद लग गई मुझको . मगर महबूब की आहट का, अंदाजा याद है अबतक . प्रतिक्रिया देने के लिए धन्‍यवाद -दीपकजोशी63

s.p.singh के द्वारा
December 1, 2010

आदरणीय जोशी जी, आपने विस्तार से जिस बीमारी का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है मैं तो यह समझता हूँ की इस प्रकार के लक्षण की कोई बीमारी है ही नहीं यह तो हर भारतीय की मनो दशा का वर्णन मात्र है अब जब आपने इसे बीमारी नामकरण भी कर दिया है पर एक बात नहीं बताई की यह किन लोगो में अधिक पाई जाती है —– शायद यह कुछ ऐसे लोंगो में पाई जाती है —— रिश्वत खोर अफसर / कर्मचारी, मिलावट खोर व्यापारी,/भ्रष्ट नेता /स्वादु साधू आदि आदि —————– आभार, एसपी सिंह, मेरठ

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    December 2, 2010

    भाई साहब आज के परिवेश में हर बुराई या कहें तकलीफ स्‍वंय में एक बीमारी ही तो है, और अपने ज्ञान के अनुसार लोग उसका नामकरण कर देते है। रिश्‍वत खोरी भी तो एक तरह की बीमारी ही तो है जिसे एक बार हो गई वह उस से ग्रस्‍त होकर काल में चला जाता है पर छुट नहीं पाता। बहुत ही अच्‍छी प्रतिक्रिया देने के लिए आभार -दीपकजोशी63

Wahid के द्वारा
December 1, 2010

श्रीमान, पहली बार आपका आलेख पढ़ा और उस पर टिप्पणी करने का दुस्साहस कर रहा हूँ! पर गंभीर बातों को हलके-फुल्के अंदाज़ में कह जाने की आपकी अदा मुझे स्व० श्री हरिशंकर परसाई जी की याद दिला जाती है| कुछ हद तक तो मैं भी इसी बीमारी की चपेट में हूँ और लगता भी यही है के आने वाले समय में ये एक असाध्य रूप धारण करने वाली है| क्या करें?! कुछ भी अधूरा नज़र आ गया तो उसी पर पूरा करने के लिए टूट पड़ते हैं के जाने फिर कब याद आये| खैर, ह्रदय के आधार से आपको साधुवाद|

    Wahid के द्वारा
    December 1, 2010

    परसाई जी की एक रचना याद आ गई जिसका नाम था अपनी-अपनी बीमारी |

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    December 1, 2010

    वाहिद भाई आदाब, आप ने हमारे सजदे में कुछ अधिक ही कसीदे पढ दिए। भई अभी घुटनों चलना सीखा है पर आप ने तो हमारी बराबरी स्व० श्री हरिशंकर परसाई जी से कर दी। अजी हम बहुत अदना से बशींदें है जो मिल गया वह लिख दिया। सादे शब्‍दों में ही अपनी ब्‍तीयां उकेर देते है। प्रतिक्रिया एवं प्रशंसा के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

razia mirza के द्वारा
November 27, 2010

चलिए दीपकजी आपको ये तो याद रहा की आप जागरण janction पर नहीं आये हैं.भाई मज़ा आ गया आपकी पोस्ट पढ़कर

    deepak joshi के द्वारा
    November 27, 2010

    रजिया जी, आदाब, भई जागरण जंकशन ही तो एक ऐसा मंच है जो हमे सभी ब्‍लॉगरों से जोडे हुए है। इस को भूल गए तो फिर इन सभी से नात टूट नहीं जाऐगा। सराहना भरी प्रतिक्रिया देने के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

Pardeep Kumar के द्वारा
November 25, 2010

भाई जोशी जी आज की तारीख में यही कामना है कि ये बीमारी लालू और पासवान को हो जाए और इसके कुछ छींटें सभी पार्टियों के बड़ें लीडरों पर भी गिरे ताकि वे हार के गम को और भ्रष्‍टाचार को भूल जाएं । प्रदीप कुमार

    deepak joshi के द्वारा
    November 25, 2010

    प्रिय प्रदीप भाई, देर से ही सही किन्‍तु बहुत ही सटीक प्रतिक्रिया मिली है। लगता है नितिश जी की खुशी के जश्‍न में आप भी इतना खुश हुए कि सोचा कि लाओ भई दीपक भाई को भी खुश कर दिया जाए एक प्रतिक्रिया का उपहार देकर। भाई साहब अब हार के गम को तो वह भूल ही जाएंगे किन्‍तु अब अगर नितिश जी ने इसी तरह बिहार के विकास में लगे रहे तो जनता आने वाले 5 वर्षो में लालू, राबरी एव पासवान को तो भूल ही जाएगी। अच्‍छी प्रतिक्रिया देने के लिए तहे दिल से शुक्रिया। -दीपकजोशी63

विनय गर्ग के द्वारा
November 23, 2010

भाई जोशी जी मुझे तो लगता है आपके मित्र के पिताजी का ध्‍यान कहीं और था इसलिए उन्‍हें यह समस्‍या पैदा हो गई । कहीं ऐसा तो नहीं है कि उन्‍होंनें आपके ब्‍लॉग पढ़ लिए हो और बस उन्‍हीं के बारे में सोचते रहते हों । ऐसे में अच्‍छे-अच्‍छे को यह बीमारी लगी नजर आएगी । आप लिखते ही इतना अच्‍छा है कि बस बार-बार पढ़नें का मन करता हैं । विनय गर्ग

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 23, 2010

    प्रिय विनय जी, भई मुझे तो यह लगता है आप शायद प्रतिक्रिया देने में कुछ कंजूस किस्‍म के लगते है मात्र पोस्‍ट को पढ कर ही रह जाते है और जवाब देने से कतराते है। मुझे तो आप भी इस तरह की किसी बिमारी के शिकार नजर आते हैं। चलिए आप ने अपने बहुमुल्‍य समय में से हमारे लिए थोडा समय निकाला जिस के लिए मै बहुत आभारी हूं। -दीपकजोशी63

C.B. Saini के द्वारा
November 23, 2010

दीपक जोशी जी, बाते सबके साथ करने का आपका अंदाज बहुत बढि़या है । पशुपतिनाथ से अजब बीमारी तक आपके की-बोर्ड का जादू चलने लगा है । मैं तो आपके लेखों पर आए कमेन्‍टस व उन पर आए आपके उत्तर पढ़-पढ़ कर ही दीवाना हो गया हूँ । बहुत बढि़या आलेख है । सी.बी. सैनी

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 23, 2010

    प्रिय सैनी साहब, आप की सराहना के लिए धन्‍यवाद जो आप मेरे लेखों को पढ़ कर उत्‍तर देने की जैहमत उठाई मै तहे दिल से आप का शुक्रगुजार हूं। और भविष्‍य में भी इसी तरह प्रशंसा एवं प्रतिक्रिया की उमिद रखुंगा। -दीपकजोशी63

Rameshwar के द्वारा
November 23, 2010

Joshiji, a good article on the disease which never looks like a disease. A.A.A.D.D. (Age Activated Attention Deficit Disorder) is activated at a certain age. But not in every person. In my opinion if some one is using or in addiction of something then this age activated attention deficit disorder got activated. I am not a doctor but these syptoms has seen in many persons around me. Rameshwar

    deepak joshi के द्वारा
    November 23, 2010

    Dear Rameshwar ji, thanks for your valuable comments, I would like to inform you that I am also not a doctor but this type of discords is called weakning of memory, it can be seen in those persons who consumes excessive alchol, chain smokers and even in the drug aditcts and also sometime in old age many people (male or female) forgets the things or repeats their instructions etc. जिस को हम हिन्‍दी में सठियाना भी कहते है। -दीपकजोशी63

Gaurav के द्वारा
November 23, 2010

पहले तो बीमारी के बारे में बतातें हैं । डर मन में बिठातें हैं और फिर कमेन्‍ट में सलाह की योगा कीजिए सब संभल जाएगा । भई बहुत खूब बस इसी तरह लगे रहिए । गौरव

    deepak joshi के द्वारा
    November 23, 2010

    प्रिय गोरव जी, प्रणाम भाई बिमारी के बारे में बता कर पहले और को इस के लक्षण बता कर आप को चेताया है इस से अवगत कराया है और फिर आप को इस से बचने का ईलाज। भई एक चुटीली प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

AANCHAL के द्वारा
November 22, 2010

दीपक जोशी जी यहां तो बीमारी का नाम अजब की जगह A.A.A.D.D. (Age Activated Attention Deficit Disorder) जिसका अर्थ आपने बढ़ती उम्र के कारण भूलने की बिमारी बताया है । यह बीमारी तो ना जाने कितने लोगो को होती है लेकिन सभी इसे ध्‍यान भटकना या एकाग्रता की कमी कहते है व उपाय अधिकांश लोग ध्‍यान लगाना व एकाग्रता बढ़ाना कहते है । फिर भी बहुत अच्‍छे तरीके से आपनें इसे बयान किया । धन्‍यवाद । आंचल

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 23, 2010

    आंचल जी, प्रणाम, आप ने सही ही कहा है ध्‍यान भटकना या एकाग्रता की कमी के कारण कई लोग इस के शिकार हो जाते है कई बार अधिक काम के दबाव के कारण भी ऐसा होता है। एक अच्‍छी प्रतिक्रिया देने के लिए धन्‍यवाद -दीपकजोशी63

Nishant के द्वारा
November 22, 2010

जोशी जी, इस तरह बद दूआ तो मत दीजिए । कृपया यही कहिए कि आपका हाल ऐसा ना हो । तथापि एक नई बीमारी से परिचय करवानें के लिए धन्‍यवाद ।

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 23, 2010

    प्रिय निशांत भाई मेर कहने को बददूआ मन समझीए, भई मैने तो आप को पहले से ही चेताया है कि हमारी उम्र तक पहुंचते पहुंचते आप भी इस दौर से गुजर सकते है। लेकिन इन सब के बचाव के लिए यदि आप मैडिटेशन या योगा करे तो इस से निजात मिल जाएगी। -दीपकजोशी63

अरुण कान्त शुक्ला \'आदित्य\' \\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\' के द्वारा
November 18, 2010

आदरणीय दीपकजी , मैं तो यही चाहूँगा कि आप की यह बीमारी और बढे और आप जो कुछ भी भूलें ब्लॉग करते रहें ताकि हमें अपने गम भूलकर मुस्कराने का अवसर मिलता रहे | गुदगुदाने के लिये धन्यवाद |

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    आदरणीय अरूण जी, प्रणाम, भई भूल से ही सही आप से परिचय तो हुआ और इस भूल के कारण आप से बात करने का अवसर, प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद -दीपकजोशी63

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 18, 2010

दीपक जी ………….. भगवान् करे आपकी ये बीमारी यूँ ही बढती रहे और एक दिन ऐसा आये की जब आप इस बीमारी के प्रभाव से अपनी सारी परेशानियाँ (पहले तो आपको कोई हो ही न) पर हो तो / वो सारी अभद्रताएं जो कभी जाने अनजाने हममे से किसी ने की हो आप उन सब को भूल जाएँ………. पर कभी न भूल पायें अपनी सारी खुशियों को और उनलोगों को जिनसे आपको खुशियाँ मिलती हैं…. और फिर जब ये हो जाये तो ये बीमारी छूत की बीमारी की तरह फ़ैल जाये और हम सब को भी अपनी चपेट में ले ले….. इसी प्रार्थना के साथ ……….. पियूष पन्त ……………..

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    प्रिय पियुष जी, भई आप लोगों का यह प्रेम ही तो है जो हमें इस मंच से जोडे जा रहा है और हम भूल कर भी इसे भूला नही पाते और लौट के इसी धरौंदे पर फिर से डेरा जमा लेते है। अच्‍छी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद, यूं ही भूल से मिलते रहो आन्‍नद आता है। -दीपकजोशी63

rajkamal के द्वारा
November 18, 2010

आदरणीय जोशी जी … नमस्कार ! जो बात मैं आप का लेख पढते हुए कमेन्ट में लिखने की सोच रहा था ….बिलकुल वोही बात आपने खुद ही इस लेख के अंत में लिख कर मेरी तो बोलती बंद कर ही दी है …बाकियो की राम जाने …. अब खुदा के लिए यह मत भूल जाइएगा की मैंने आपकी रचना पे कमेन्ट भी किया है …. क्योंकि और कुछ भी अगर भूल जायेंगे तो चलेगा …मगर , अगर यह भूल गए तो परेशानी हो जायेगी ….

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    प्रिय राजकमल जी, भ्ईया जी आज कल तो आप हमारी पोस्‍ट पर प्रतिक्रिया देना ही भूल जाते हो, और तो और प्रतिक्रिया पर भी जवाब नही देते हो, भई किसी डाक्‍टर को दिखाओं यह भूलने की बिमारी क्‍या आप को भी लग गई है क्‍या। भई कोई नाराजगी हो तो हमें मेल कर दो, वह सार्वजनिक नही होगी। -दीपकजोशी63

    deepak joshi के द्वारा
    November 19, 2010

    देखिए भूलने के कारण प्रतिक्रिया का पुरा जवाब नहीं दे पाया – आप ने कहा की – मेरी तो बोलती बंद कर ही दी है …बाकियो की राम जाने …. भाई साहब इस ब्‍लाग पर आप जैसे ही तो मर्द या कहें दबंग चाहिए जो औरों की बोलती बंद करने का जज्‍बा रखते है और आप की ही बोलती बंद हो गई तो हम तो कही के नहीं रहेंगें।

    rajkamal के द्वारा
    November 19, 2010

    आदरणीय दीपक जी …आपने मेरे घर पे दुबारा आना गवारा नहीं किया …अगर मिलने की चाह मन में लिए हुए आप फिर से आने की जहमत उठाते तो फिर ऐसी शिकायत हरगिज नहीं करते …. आप की पोस्ट पे कमेन्ट न करने की गलती मुझसे हो सकती है …लेकिन मेरी खुद की पोस्ट पे आपके अनमोल विचारों की मैंने कद्र न की हो …ऐसा होना नामुमकिन है …. चेक कर के बताइएगा …इंतज़ार में …

    deepak joshi के द्वारा
    November 20, 2010

    रामकमल भाई आप हमारी चुटकी को भी सच मान गए क्‍या। हम तो यह मजाक में ही लिखा था। प्रतिक्रिया देने में तो सब से आगे है। हमें आप से कोई शिकायत नही है।

priyasingh के द्वारा
November 18, 2010

घटनाओं की सिलसिलेवार प्रस्तुति बहुत अछि लगी…….आपकी याददाश्त तो अब जाकर यूँ हुई है और मेरे दिमाग ने तो अभी से भूलना शुरू कर दिया है………..लेकिन मैंने ये बात नोट की है की जो लोग चश्मा पहनते है वो सबसे ज्यादा उसी को भूलते है ऐसा क्यों…….

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    प्रिया जी प्रणाम, कलम एवं चश्‍मा तो लगता है भगवान ने भूलने के लिए ही बनाए है, पर नए फैशन ने उस में भी डोरी बांधने का प्रवधान कर दिया है। सरहाना के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

kmmishra के द्वारा
November 18, 2010

जोशी जी नमस्कार । हो जाता है, किसी किसी दिन ऐसा हो जाता है । परेशान मत होईये । रोशनी जी और अश्विनी जी और चातक जी ने ठीक कहा है । सीरियसली लेने की जरूरत नहीं है । सीरियसली तब लीजियेगा जब आपकी ब्लागर लिस्ट का कोयी मित्रब्लागर इस लेख पर कमेंट करना भूल जाये । पकड़ कर सोटियेगा पट्ठे को कि प्यारे यह लेख तुम्हारे जैसे भुलक्कड़ों के लिये ही लिखा गया है । चल कर कमेंट कर मेरे भोलू-मोलू । आभार ।

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    प्रिय के.एम. मिश्र जी, प्रणाम भाई, पहले तो मै आप को बधाई देता हूं की दिपावली पर जो आप ने घर पर जो पेंट एवं रंग रोगन करवाया है उस का रंग आप के प्रतिक्रिया देने के स्‍टाईल पर भी कुछ-कुछ व्‍यक्‍त हो रहा है। भईया यही तो आप लोगों का प्रेम है जो इस मंच पर हमें खीच लाता है और अगर आप लोगों से न बतियाएं तो मजा ही नही आता। मैं भी व्‍यस्‍तता के कारण कुछ समय से जागरण से दूर रहा पर आप सभी से नजदीकी वही पुरानी ही रहेगी। अच्‍छी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद -दीपकजोशी63

Arvind Pareek के द्वारा
November 18, 2010

प्रिय दीपक जोशी जी, जब ध्‍यान भटका कर दायरा जैसी कविताएं लिखेंगें तो यह तो होना ही था । लेकिन आपकी याददाश्‍त की भी दाद देनी होगी जो सिलसिलेवार सब याद रखा और इस कैनवास पर हुबहू उतार दिया । लेकिन क्‍या यह वास्‍तव में एक बीमारी है । नई जानकारी के लिए आभार । अरविन्‍द पारीक

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    प्रिय अरविंद जी, भई लगता है आप को दायरा कुछ ज्‍यादा ही अच्‍छा लगा और शायद उसे पढ़ कर आप भी कुछ ज्‍यादा जी उन्‍मादित से लगते है। लगता है आप के मन मे भी कुछ यादों के बुल-बुले उठ रहे है। क्ही ऐसा तो नहीं आप इन दायरों के कारण अपने पंख समेटे हुए उड़ने की अपनी इच्‍छाओं को दबा कर बैठे हो, भई रोशनी जी के परिदों की तरह आप भी मन के आकाश में उडो ताकि जो दबी हुई मन के विचार है वह बाहर निकलेंगे और हम व्‍लॉगरस इस से अभिभुत होगें। अच्‍छी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

    deepak joshi के द्वारा
    November 19, 2010

    प्रिय अरविंद जी, देखा आप ने भूलने के कारण भूल से आप की प्रतिक्रिया का जवाब अधूरा ही छोड़ दिया। आप का प्रश्‍न सही है – यह वाकई में एक बीमारी ही है जिसे मनोचिकित्‍सक ने अपने आधार पर नाम दे दिया है। असल में यह लक्षण मेरे एक मित्र के पिता जी को हुए और वह कुछ अधिक ही परेशान थे तो उन्‍हे डॉक्‍टर को दिखाया गया। जिस ने इस बिमारी के विषय में विस्‍तार से जानकारी दी, आप ब्‍लॉगरों को तो मैने इस के रोचक पहलू से ही अवगत करवाया है किन्‍तु उन के पिता जी का मर्ज कुछ इस कदर बढ गया था कि वह एक बार खाना खाने के बाद कुछ देर पश्‍चात भूल जाते थे एवं पुन; खाना मांग लेते थे। और यह मजाक नही है पर हां यह सत्‍य है कि यह एक बीमारी है और यह मनोरोग से संबध रखती है।

    rajkamal के द्वारा
    November 19, 2010

    आदरणीय जोशी जी …यह कोई बीमारी विमारी नहीं है बल्कि सरासर बहाना है …आपने चटोरेपन पे पर्दा ढकने के लिए …. क्या उन महाशय ने कभी किसी को एक बार अदायगी करने के बाद दुबारा भी की है कभी …. पैसो के मामले में भी वोह भुलक्कड़ है या फिर चतुर सुजान ….

roshni के द्वारा
November 18, 2010

दीपक जी ये तो झूठ है, आपको भूलने की बीमारी हो ही नहीं सकती कम से कम आपके लेख से तो नहीं लगता … देखिये आप एक भी बात लिखना नहीं भूले सब बिलकुल सिलसिलेवार लिखा है ……. और वैसे भी सुबह का भुला शाम को घर आ जाये तो भुला नहीं कहलाता ………. अच्छे लिखा अपने .. रौशनी

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    रोशनी जी मैने निशा जी को तो सच्‍चाई बता ही दी है, कि कपड़ा चाईना का और लेबल है इंडिया का, कहने का तात्‍पर्य यह है कि यह बिमारी मेरे एक दोस्‍त के पिता जी को डॉक्‍टर (साईक्‍लोजिस्‍ट) ने बताई थी किन्‍तु रोज कि दिनचर्या में काम की अधिकता के कारण ऐसे एन्‍काउन्‍टर हर व्‍यक्ति के साथ होते ही रहते है, मैने तो मात्र स्‍वंय का अनुभव आप लोगों से बांटा है और जागरण पर आप लोगो (ब्‍लॉगरों) से जुडे रहने एवं अच्‍छी अच्‍छी प्रतिक्रियाएं एवं चुटकीयों की अभीलाषा के लालच में यह पोस्‍ट लिख डाली। प्रति‍क्रिया देने के लिए बहुत सा धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

ashvinikumar के द्वारा
November 18, 2010

जोशी जी यह बीमारी नही वयस्तता है आज के इस दौर में व्यक्ति के पास समय इतना कम हो गया है कि एक किया वो भी अधूरा दूसरा सर पर आ गया ,आपने जितनी घटनाएं वर्णित की हैं आपका मस्तिष्क किसी कार्य के प्रति एकाग्र कहाँ हो पाया ,समय ही नही मिला उसे ,रेलगाड़ी से बाहर बिजली के खंभों को आप चाह कर भी याद नही कर पाते हैं,,वही स्थिति उपरोक्त घटनाओं में भी है …आप मंच पर अपने विचारों से लोगों को अवगत करवाते रहें ……….जय भारत

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    प्रिय अशवनी जी, आप ने सही ही पहचाना है इस बिमारी के लक्षण को और यह एक आम बिमारी है जो आजकल के माहौल में भागती दौडती जीवनचर्या में सभी को ग्रसीत करती है। आप ने सही ही कहा है की चलती रेलगाड़ी से बाहर झांक कर खंबो को याद कर पाना बहुत ही मुशकिल है। अच्‍छी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद -दीपकजोशी63

R K KHURANA के द्वारा
November 18, 2010

प्रिय जोशी जी, पंजाबी में इसे कहते है “सत्त्रे-बह्तरे” गए ! शायद आप उस स्टेज पर पहुँच गए है ! अच्छा लेख १ खुराना

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    आदरणीय खुराना जी, प्रणाम भाई साहब अस्‍सी ते हुढ जल्‍दी ही सठीया गए हेंगे। कहन्‍दे ने के उम्र पच्‍चपन दी ते गल्‍ला बच्‍पन दी तो पर ऐथे तो अस्‍सी 47 दे पर दिमाग 60 दा। फोटो पर न जाएं दिल तो साड्डा भी अभी जवा हैगा। प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

    R K KHURANA के द्वारा
    November 27, 2010

    प्रिय जोशी जी, आपके जवाब में मैं आपसे कहना चाहता हूँ की आप मेरा लेख “अभी तो मैं जवान हूँ” पढ़ लें ! उसमें भी मैंने लिखा है बच के वार करना मुझ पर मैं भी तीर कमान हूं , सत्तर का हुआ तो क्या हुआ, अभी तो मैं जवान हूं ! राम कृष्ण खुराना

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 18, 2010

आदरनीय जोशी जी सादर प्रणाम……………धारा प्रवाह तरीके एक काम को ध्यान में रख दुसरे को पूरा करने की सोचते सारे कामो को अस्त ब्यस्त ही छोड़ दिया आपने,खैर जिस बीमारी का जिक्र आपने इस लेख के द्वारा किया है मुझे लगता है की इस ब्यस्त जीवन में वो किसी भी उम्र में हो सकती है,धन्यवाद!

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    प्रिय धर्मेश जी, आप ने सही ही कहा है यह बिमारी आज एक आम प्रवृति है जो आज के आधुनिक जीवन की तेज रफतार से दौड़ती जीवन चर्या के कारण किसी न किसी को ग्रसित करती है, दिमाग तो 1;50 ग्राम का और बोझा 100 किलो का तो भई वह तो पिस ही जाऐगा। प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

आर.एन. शाही के द्वारा
November 18, 2010

दीपक भाई अब मान लेना चाहिये कि पांव लटक चुके हैं, बुद्धि भटक चुकी है और सांस भी अटकने ही वाली है । ज़बर्दस्ती की रगड़ से अच्छा है कि स्वाध्याय किया जाय । साधुवाद ।

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    आदरणीय शाही जी, प्रणाम भाई साहब सब के सामने तो अपनी जवानी को ब्‍यां न करे, सही मे तो हम अभी आप से उम्र व तर्जुबे में बहुत ही पीछे है। एक अच्‍छी चुटकी के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

chaatak के द्वारा
November 18, 2010

स्नेही दीपक जी, काफी दिनों बाद आपके दर्शन हुए वो भी एक ऐसी समस्या के साथ जिसे डाक्टर तो समस्या कह सकते हैं लेकिन मुझे इस कमी को कुशलता कहने में कोई परहेज़ नहीं| आप मेरा उदहारण ले सकते हैं| मैं बहुत ही कम चीज़ें भूलता हूँ और मुझे इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है| किसी कवि ने लिखा है “आदमी हो जाए दीवाना, याद करे गर भूल न जाए” यानी याद रखने से भूलना ज्यादा अच्छा है| प्रख्यात निबंधकार रॉबर्ट लिंड का कहना है “Forgetting seems to me all but a virtue of human memory because a forgetful man is often a man who is making the best of life.” महान आधुनिक विचारक श्री हिमेश रेशमिया जी भी न भूल पाने का अपना दुःख कुछ इस तरह से व्यक्त करते है “तुझे भूल जाना-जाना मुमकिन नहीं, तू याद न आये ऐसा कोई दिन नहीं !” और फिर उनकी भी आँखों में आंसू आया जाते है| आपकी याददाश्त तो माशाल्लाह काफी अच्छी है देखिये आप हमें भूल नहीं पाए| Don’t worry, be happy! हम साथ साथ हैं| :)

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    प्रिय चातक जी, प्रणाम भई आप के विचार और यारदाशत दोनो ही काबिले तारिफ है, और आप की यह बात तो मै नुस्‍खे की तरह हमेशा अपने साथ रखा करूंगा कि – “आदमी हो जाए दीवाना, याद करे गर भूल न जाए” बहुत ही अच्‍छे शब्‍दों में प्रतिक्रिया देने के लिए धन्‍यवाद और अब मै पुरानी सब बातें भूल जाता हूं। -दीपकजोशी63

nishamittal के द्वारा
November 18, 2010

कोई आश्चर्य की बात नहीं दीपक जी थोडा सा सुधार कर लीजिये बीमारी में कडवी बातें भूल जाएँ और मीठी- मीठी याद रखें.होमोपथिक इलाज करवाएँ आप भी खुश परिवार भी खुश.

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    November 19, 2010

    आदरणीय निशा जी, प्रणाम वो आप ने सुना होगा सामान देसी पर लेबल कंपनी का। यहा भी वहीं हुआ, असल में यह बिमारी मेरे एक मित्र के पिता जी को बताई गई थी किन्‍तु इस तरह के लक्षण मैने स्‍वंय भी महसूस किए तो आप सब के साथ अपना अनुभव बांट लिया। डॉक्‍टर से सलाह करने पर पता चला कि यह एक आम बिमारी है काम की अधिकता के कारण भी कई बार आदमी कुछ बाते भूल जाता है। आप की सलाह एवं अच्‍छी प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद -दीपकजोशी63


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