बातें सबके साथ Baatein Sabke Saath

बातें जो रह गई याद

13 Posts

343 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2909 postid : 3

श्री पशुपतिनाथ अष्‍टमुखी दर्शन, मंदसौर (म.प्र.)

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अभी हाल ही में मैंनें एक ब्‍लॉग पढ़ा । सौहार्द के प्रतीक धार्मिक उत्‍सव । मुझे लगा कि कितना सही कहा गया हैं । कितना सही लिखा गया है । वास्‍तव में सभी धार्मिक उत्‍सव सौहार्द, स्‍नेह, प्रेम, सहनशीलता, सदभाव, आदि को बढ़ाते ही है । चाहे ये किसी भी धर्म से संबंधित हो ।

ltemple1

मैं कुछ समय पूर्व सावन माह में मंदसौर, जो मध्यप्रदेश में है, गया था । वहॉ पर मैं श्री पशुपति नाथ जी (शिव जी) के एक प्राचीन मंदिर के दर्शन के लिए गया था। जिसका आजकल जीर्णोंद्दार का कार्य चल रहा है तथा सावन माह में मंदिर निर्माण में सहयोग देने के लिए मनोकामना महाअभिषेक का आयोजन किया गया था जो एक माह तक चला जिस में सामूहिक पूजा का प्रावधान था जिस में लोग जोड़े से (चाहे पति एवं पत्नी हो या माँ एवं बेटा हो या फिर दो मित्र ही हों) बैठ कर भगवान शिव कि अराधना करते हुए परंपरागत तौर से एवं विधिविधान से मंत्रोंच्चारण के साथ पुजा करते है। स्टेज पर पाँच छः पुरोहित माईक पर बोल कर विधान से महाअभिषेक की पुजा संपन्‍न करवाते है और यह पुजा करीब दो घंटे तक चलती है। पुजा के लिए सभी सामग्री आदि मंदिर ही उपलब्ध करवाता है जैसे कि फूल, बेल पत्र, रोली अक्षत, दिया इत्यादि एक थाली में आप के बैठने के स्थान पर पहले से ही उपलब्ध होता है तथा इस के लिए मात्र 1100/ रूपये जमा कराने होते है जिस को वह निमार्ण कार्य पर खर्च कर रहे है। यहाँ इतने विस्तार से बताने का कारण यह है कि इस मंदसौर जिले में सभी संप्रदाय के लोग रहते है जिस में हिंदू, मुसलमान, सिख इत्यादि ।

ltemple2ltemple3

वहॉं जा कर यह पता चला एवं मैने स्वंय यह देखा कि सिख संप्रदाय के भी कई लोग वहां उस पुजा में उपस्थित थे । तथा प्रबंध समिति के सदस्‍यों से यह भी पता चला कि बहुत संख्या में मुसलमानों ने भी इस अनुष्ठान के लिए अपनी ओर से 1100/ रूपये दान में दिए और उनकी जगह व उनके नाम से किसी और को बैठाया गया व पुजा अर्चना की गई ।

pashupati2pashupati

यहाँ यह सब बात कहने का अर्थ केवल यही है कि हमारे समाज में भेद भाव हैं, नही पर कुछ असमाजिक तत्व इस प्रेम को देख कर जलते है और किसी न किसी बात पर उसे भड़का कर झगड़े का रूप दे देते है जिस से हमारे बीच दीवार खिंच जाती है।

यदि आप इस मन्दिर के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो इतिहासपरिचय यहां पढ़ें । यहां पहुँचनें की जानकारी इस लिंक से प्राप्‍त करें

दीपक जोशी



Tags:                                           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

15 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sachin joshi के द्वारा
October 17, 2010

good job bhai ji

chaatak के द्वारा
September 11, 2010

आदरणीय जोशी जी, धार्मिक सहिष्णुता और सद्भाव की जो मिसाल यहाँ आपने सचित्र दिखाई है हमारा देश वास्तव में इसी साझा संस्कृति का देश है| मजहब कभी भी यहाँ के निवासियों की पहचान नहीं रहा है लेकिन जब से लोग ज्यादा समझदार हो गए हैं तब से ही ये मजहबी रोष और अलगाव भी सामने आया है| अगर आप किसी गाँव में देहाती लोगों के बीच जाकर देखें तो वे आज भी वैसे ही नज़र आयेंगे | मुसलमान राम-राम कर आपका अभिवादन करेगा और पायक बने नज़र आयेंगे | धार्मिक सौहार्द और आस्था के प्रतीक शिवालयों की मनोरम छवि जागरण जंक्शन के मंच पर शेयर करने के लिए आपका धन्यवाद! अगली पोस्ट की प्रतीक्षा रहेगी|

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 11, 2010

    प्रिय चातक जी, मेरे लेख को आप ने सराहा इस के लिए धन्‍यवाद, और आप ने बिलकुल सही कहा है यही धर्मिक सौहार्द के सही दर्शन आज के समय में करना चाहते है तो वह केवल हमें गांवों में ही देखने को मिलेंगे।

Vinay Garg के द्वारा
September 8, 2010

प्रिय दीपक हाय, आपका ब्‍लॉग पढा, यह जानकर आश्‍चर्य हुआ कि पशुपतिनाथ मंदिर, मंदशोर में मुस्लिम समुदाय का सहयोग एवं आस्‍था है । तभी तो धरती पर मेरा भारत महान कहा जाता है । ऐसी आस्‍था, सेवा भावना, लगाव कहीं ओर देखने को नहीं मिलेगा । आपके लेख में पशुपतिनाथ मंदिर के चित्रों के मुझे घर बैठे दर्शन हो गए । आप इसी तरह लिखते रहें, मुझे आपके अगले लेख का इंतजार रहेगा । विनय

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 9, 2010

    प्रिय विनय जी, आप का बहुत बहुत धन्‍यवाद जो आप ने मेरे लेखे को सराहा, शायद श्री पशुपतिनाथ जी की अनुकंपा से मेरा मार्ग दर्शन हुआ हो और मैं इस परिवार से जुड गया और मै चाहुंगा कि आगे भी आप सभी को मेरे अन्‍य लेख पढ्ने को मिलें। मेरा अगला लेख आप को अति शिघ्र ही इसी ब्‍लाग पर पढ्ने को मिलेगा।

Ritesh के द्वारा
September 7, 2010

दीपक जोशी जी, पशुपतिनाथ के घर बैठे दर्शन करवानें के लिए हम आपके आभारी है । साथ ही कमेंट में खुराना जी को दिए गए जबाव से भी ज्ञान प्राप्‍त हुआ है । पहली ही प्रस्‍तुति बहुत अच्‍छी है । आशा है आगे भी अच्‍छी जानकारी मिलती रहेगी । रितेश

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 10, 2010

    रीतेश जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ । उत्‍साह बढ़ानें के लिए धन्‍यवाद । मैं शीघ्र ही अगली पोस्‍ट प्रस्‍तुत कर रहा हूँ । आशा है आप इसी तरह उत्‍साह बढ़ाते रहेंगें । दीपक जोशी

R K KHURANA के द्वारा
September 6, 2010

प्रिय दीपक जी, भगवान pashupati nath के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए बधाई ! मैं मंदसौर तो नहीं गया हाँ मैं नेपाल के पशुपति nath mandir में कई बार गया हूँ तथा वहां शंकर भगवान के दर्शन किये है ! बहुत ही सुंदर व भव्य मूर्ति है तथा उसके चार मुख हैं और मंदिर के भी चार दरवाजे है जहाँ से दर्शन किये जा सकते है ! सुंदर रचना राम कृष्ण खुराना

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 6, 2010

    खुराना जी, प्रशंसा के लिए धन्‍यवाद, मै आप को यह बताना चाहूंगा कि यह मूर्ति तो 200 वर्ष पुरानी है किंतु मंदिर का निर्माण बाद में हुआ और अब वहां के लोग एक जुट होकर इसके जिणोंदद़ार के लिए धन एकृत्र करने लगे है पिछले वर्ष 5 करोड् रूपये एकत्र किए गए है इसी कारण वहा सावन माह में मनोकामना अभिषेक का आयोजन किया गया था जिस के विषय में मैने बताया था यहां शिव जी की अष्‍टमूखी मूर्ति है जिस में शिव जी के चारो रूप बाल अवस्‍था, युवावस्‍था, प्रौणावस्‍था एवं व़धा अवस्‍था के साक्षात दर्शना है

    R K KHURANA के द्वारा
    September 12, 2010

    प्रिय दीपक जी, आपकी इस जानकारी के लिए धन्यवाद् खुराना

Arvind Pareek के द्वारा
September 6, 2010

प्रिय श्री दीपक जोशी जी, यात्रा वृतांत व पर्यटन स्‍थल की जानकारी वह भी चित्रों के साथ । भई वाह मजा आ गया । बहुत ही अच्‍छे तरीके से आपनें जानकारी दी है । जो भी इस धार्मिक सदभाव बढ़ानें वाले स्‍थल की यात्रा करना चाहेगा उसे अवश्‍य इस जानकारी से लाभ होगा । बस इसी तरह लिखते रहना । मेरी शुभकामनाएं व बधाई ।

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 9, 2010

    श्री पारिख जी, बहुत धन्‍यवाद आपका, और मुझे अच्‍छा लगा जो आपने मेरे इस लेख के विषय में अपनी प्रतिक्रिया उन्‍मुक्‍त लहजे में जाहीर करी और आगे भी आप से यही आशा करता रहूंगा। आप से एक और अनुरोध है कि आप भाई जी को भी मेरा यह लेख पढा दिजिएगा।

Rakesh Kaushik के द्वारा
September 6, 2010

जोशी जी, एक अच्‍छी जानकारी देने का धन्‍यवाद । वास्‍तव में जानकारी बहुत बढि़या है । आपनें सौहार्द के प्रतीक धार्मिक उत्‍सव शीर्षक से भाईजीकहिन ब्‍लॉग पढ़ा होगा । आपने बहुत ठीक लिखा है कि वास्‍तव में सभी धार्मिक उत्‍सव सौहार्द, स्‍नेह, प्रेम, सहनशीलता, सदभाव, आदि को बढ़ाते ही है । चाहे ये किसी भी धर्म से संबंधित हो । राकेश

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 6, 2010

    राकेश जी प्रशंसा के लिए धन्‍यवाद और आगे भी मै आप से ऐसा प्रोत्‍साहन चाहुगा क्‍योंकि यह मेरी पहला लेख हैा आप लोगों को देख कर ही कुछ लिखने का मन बना पाया


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran