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बातें जो रह गई याद

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मेरी टी.आर.पी. बढ़ाओ .............

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बातें सब के साथ – बातें जो रह गई याद, या यूं कहिए पाठकों वो बातें जो मन को चुभती है पर कोई मंच नहीं है उन को व्‍यक्‍त करने का, तो मै इसी मंच के माध्‍यम से ही दिल का हाल ब्‍यां कर रहा हूं।

 

दिल का हाल कहे दिल वाला

सीधी सी बात न मिर्च मसाला

कह के रहेगा कहने वाला ……

 

हां तो पाठकों टी.आर.पी. – इस विषय को पढ़ कर आप भी एक बार को सोच में पड़ गए होगे कि यह कौन मूर्ख है जो खुल्‍लम-खुल्‍ला गोपनीय बातों को उजागर कर रहा है। पर पाठको, यह विषय ही कुछ ऐसा है।

 

      पाठको, हमें अंग्रेजी आती नहीं और हिंदी में हाथ तंग है और इस का अंदाजा आप को मेरी पहली दो पोस्‍ट को पढ़ कर लग ही गया होगा।

 

टी.आर.पी. का असली मतलब हम भी नहीं जानते थे। पर कल अचानक केबल पर एक फिल्‍म चल रही थी तो हम भी परिवार के साथ देखने बैठ गए, नाम था – पीपली लाईव – भई आमिर खान ने कम बजट कि इस फिल्‍म के माध्‍यम से पत्रकारिता पर एक गहरी चोट मारी है। उन्‍होंने यह ठीक दिखाया है कि ये न्‍यूज चैनल वाले अपनी इस टी.आर.पी. को बढ़ाने के चक्‍कर में क्‍या-क्‍या नही कर गुजरते हैं। एक गरीब किसान जिसके मुंह से केवल गलती से ही एक पत्रकार के सामने यह निकल जाता है कि वह आत्‍महत्‍या करने जा रहा है, और बस फिर क्‍या था, एक नही दसियों न्‍यूज चैनल वाले उसका साक्षात्‍कार लेने के लिए उस के घर पर डेरा डाले कई दिनों तक पड़े रहे, और उस गरीब का घर से निकलना एवं जंगल जाना तक दुसवार कर दिया। और तो और जब वह चोरी से घर से निकल कर खेतो में शौच कर रहा था तो भी एक पत्रकार अपने कैमरा मैन से बोला भई इस क्रिया की भी पूरी कवरेज करो इस में भी बहुत दम है।

 

आज यह न्‍यूज चैनल वाले अपने चैनलो की टी.आर.पी. बढ़ाने के लिए एक आम खबर को भी सनसनीखेज बना कर पेश करते है। ज्‍यादा दूर नहीं जाएं तो ईद के दिन शनिवार को एक न्‍यूज चैनल विशेष ने सुबह से ही दिल्‍ली में आई बाढ़ की विशेष कवरेज के लिए अपने कुछ पत्रकारों को लगा रखा था जिसे वह हर न्‍यूज में एस्‍क्‍लूसिव रिपोर्ट के नाम से दिखाते रहे।

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जिस प्रकार महाभारत के युद्ध में कृष्‍ण को अपनी ओर मिलाने के लिए कौरव और पांडवों ने सोते हुए कृष्‍ण की शय्या को सिरहाने एवं पैताने से घेर रखा था वही हाल हमारे पत्रकारों का था। उन्‍हें भी दिल्‍ली में बाढ़ केवल मोनेस्‍ट्री एवं कशमीरी गेट बस अडडे के पास, एवं पुराना पुल पर ही दिखाई दे रही थी। (बात भी सही है बाकि सब तो नई दिल्‍ली है) और वहीं की चार तसवीरों को वह सुबह से शाम तक दिखाते रहे। हां यह भी तारीफ की बात है कि बटाला हाऊस एवं कालिंदी कुंज के बारे में भी रनिंग कैप्‍शन टी.वी पर लगातार चल रहा था पर कोई चित्र या विडियो नहीं था। या यू कहें कि सभी न्‍यूज ब्राडकॉस्‍ट करने वाली गाडियां वहीं पर थी तो वह चैनल वाले अलग कैसे जा सकते थे।

 

रिपोर्ट तो सनसनी फैलाने सी ही चटपटी होती है। दिल्‍ली की सी.एम. की बात को ही तुल दे कर बार-बार यह दर्शाया जा रहा था कि वो कहती है दिल्‍ली को कोई खतरा नहीं है। पर हम (न्‍यूज वाले) कहते है कि आज दिल्‍ली जरूर डूबेगी। सी.एम. कोई भगवान नहीं है, पर उन के पास पुरी मशीनरी है, जिस से विचार विमर्श के बाद ही इतनी बड़ी बात वो प्रेस से कहने आई थी।

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पर उन का नाम ले कर रिपोर्टरों ने तो ऐसी सनसनी फैला दी की पाठकों कई रिश्‍तेदारों के फोन आने लगे कि क्‍या दिल्‍ली वाकई में डूब गई है।

 

और तो और पाठकों इतवार को यानी 12/9/2010 को एक और चैनल भी मुस्‍तेद हो कर जिसने इतना बड़ा लाईव कवरेज कभी नहीं किया पर उस दिन 5-6 नए नए रिपोर्टरो जिन कि कभी हम ने उस चैनल पर शक्‍ल भी नही देखी को न्‍यूज कवरेज के लिए लगा दिया और 12.00 बजे से ही कशमीरी गेट, जमुना बाजार, हनुमान मंदिर एवं पुराना पुल तक ही दिल्‍ली को सीमित करके पुरी दिल्‍ली मे बाढ़ ही बाढ़ के प्रकोप को दर्शा रहे थे।

 

अब इन को कौन बताए की भाई दिल्‍ली 40 से 60 कि.मी के रेडियस मे है और दिल्‍ली से ज्‍यादा नुकसान तो हरियाणा के तटबंघ टूटने से हरियाणा और उस से लगे यू.पी के कई निचले इलाको में हुआ है वहां कौन जाना चाहेगा जिन किसानों कि खड़ी फसले नष्‍ट हो गई है या जिन के घर उजड़ गए है वह दिखाने में टी.आर.पी घट जाती है।

 

 

पाठको इसी पर एक हास्‍य है – एक आदमी यमुना के पुल पर खड़ा होकर बाढ़ का नजारा देख रहा था अचानक वह नदी के बहाव में गिर जाता है। परन्‍तु वहॉं पर मौजुद गोताखोर उसे बचा लेते है, इतनी ही देर में यह प्रेस वालों कि दर्जनों गाडियां वहां पहुंच जाती है और उस व्‍यक्ति को घेर कर उस पर प्रश्‍नों की बौछार कर देती हैं – भई साहब आप पानी में कैसे गिरे? पानी ठंड़ा था या नहीं? पानी की धार तो तेज थी? आप को बाहर आ कर कैसा लग रहा है? इत्‍यादि इत्‍यादि – वह व्‍यक्ति गुस्‍से से कहता है पहले मुझे यह बताओ कि मुझे धक्‍का किस ने दिया था ……

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तो कहने का तात्‍पर्य यहां यह है कि उस पीडि़त व्‍यक्ति को सांत्‍वना देने की जगह उस पर प्रश्‍नों कि बौछार कर दी जाती है। क्‍योंकि यही सनसनी है।

 

पाठकों, इस सब को देख कर ऐसा नहीं लगता है कि आज जमाना सनसनी से ही ज्‍यादा प्रभावित है। जैसे धमाका सेल 50 प्रतिशत छुट, 80 प्रतिशत छुट आदि रू. 100  का माल रू. 20 में।

 

तो पाठकों मैने भी इतनी सनसनीखेज बातें आप को बताई है तो क्‍या आप लोग मेरी टी.आर.पी बढाने के लिए इस विषय पर अपने सुझाव नहीं देंगे।

 

आशा करता हूं मेरी टी.आर.पी. जरूर बढ़ेगी।

 

- दीपक जोशी



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Arvind Pareek के द्वारा
September 17, 2010

प्रिय श्री जोशी जी, दिल का हाल कहे दिल वाला सीधी सी बात न मिर्च मसाला कह के रहेगा कहने वाला …… ये दिल का हाल नहीं दिल्‍ली का हाल है और साथ में टी आर पी का सवाल है । लेखनी में कमाल है । जागरण पर मचाया धमाल है । बहुत बढि़या । मुझे आज पता चला कि जोशी जी सिर्फ बातों में ही नहीं लेखनी में भी तेज है । लगे रहिए । मेरी शुभकामनाएं व बधाई । अरविन्‍द पारीक

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 17, 2010

    प्रिय अरविन्‍द जी, ये दिल का हाल नहीं दिल्‍ली का हाल है और साथ में टी आर पी का सवाल है । लेखनी में कमाल है । जागरण पर मचाया धमाल है । भई आपका तारीफ करने का अंदाज सब से जुदा है इस प्रकार की तुकबंदी एवं उत्‍साहवर्धक टिप्‍पणी के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

kmmishra के द्वारा
September 16, 2010

टी आर पी की महिमा अनंत है । जागरण जंक्शन पर हिंदी में ब्लागिंग करने के लिये और व्यंग विधा को समृद्ध करने के लिये बहुत बहुत आभार । आपका जागरण जंक्शन पर स्वागत है जोशी जी ।

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 17, 2010

    प्रिय मिश्रा जी, उत्‍सावर्धन के लिए धन्‍यवाद।

roshni के द्वारा
September 16, 2010

दीपक जी आपकी टी र पी तो इस लेख के नाम से वैसे ही अपने आप ही बढ़ जाएगी…….. और टी आर पी का तो पता नहीं मगर हाँ न्यूज़ वालों ने पानी का स्तर कुछ ज्यदा ही बड़ा चढ़ा कर दिखा दिया … मैंने भी न्यूज़ देख कर अपनी बहन को फ़ोन करके पूछा क्या तुम्हारे वह बाढ़ का पानी आ गया है टी.वी में दिखा रहे है तो वहां से उत्तर मिला हमने तो अभी न्यूज़ देखी ही नहीं हो सकता है बाढ़ आ गयी हो.. बहुत बढ़िया लेख पर बधाई

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 16, 2010

    रोशनी जी, टिप्‍पणी के लिए धन्‍यवाद, सत्‍य तो यही है न्‍यूज को देख हमारे साथ भी यही हुआ और हम अपने रिशतेदारो को समझाते हुए थक गए।

soni garg के द्वारा
September 16, 2010

बात तो सही कही है इन न्यूज़ वालो का बस चलता तो इन्होने कब का दिली को डुबो दिया होता !

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 16, 2010

    कु. सोनी जी, मेरी टी.आर;पी बढ़ाने एवं टिप्‍पणी लिखने के लिए धन्‍यवाद।

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
September 15, 2010

सर बहुत ही बढ़िया व्यंग, पढ़कर बहुत अच्छा लगा | सच कहें तो ये बाजारवाद की मार है, जिसने मीडिया को टी आर पी नाम का अलादीन का चिराग दे दिया है, जिसे घिसकर हर कोई आका से हर बात पूरी करावा लेना चाहता है | वैसे सर आप ऐसे ही लिखते रहें, आप की टीआरपी अलग कीर्तिमान बनाएगी … इतने सुन्दर व्यंग के लिए बधाई, और हमें पढ़ने का अवसर देने के लिए धन्यवाद …

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 15, 2010

    प्रिय शेलेश जी, आप ने भी हमारे टुटे हुए तारों को आगे जोड़ा है और क्‍या सही कहा हे कि ये बाजारवाद की मार है, जिसने मीडिया को टी आर पी नाम का अलादीन का चिराग दे दिया है, जिसे घिसकर हर कोई आका से हर बात पूरी करावा लेना चाहता है| यही सत्‍य है यह लोग प्रैशर टैक्‍नीक से अपनी बात को मनवाना चाहते है और दूसरे को यह नीचा दिखाना चाहते है। सस्‍नेह धन्‍यवाद।

chaatak के द्वारा
September 15, 2010

स्नेही जोशी जी, इस लेख में जो सरल शब्दों में छिपा तीखा व्यंग है वह निश्चय ही आपकी टी. आर. पी. बढ़ा देगा| वैसे मेरी एक राय है क्यों न इस लेख में पत्रकारों पर (इमरती की तरह) सीधा और (बिलकुल आम हिन्दुस्तानी की तरह) सरल व्यंग करने के लिए हम इस मंच पर इसे टी. आर. पी. (टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स) न कहकर जे.आर. पी.(जागरणजंक्शन रेटिंग पॉइंट्स) नाम दे कर आपको बहुत सारे रेटिंग पॉइंट्स दे दिए जाएँ| अच्छे व्यंग पर बधाई!

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 15, 2010

    प्रिय चातक जी, सजदा से आप मेरे अधिक स्‍नेही हो गए है आप की प्रशंसा सर माथे। पर हां आप की बात में दम है भई, टी.आर.पी से बड़ी तो जे.आर.पी. है इस के विषय में भी सोचना पडेगा। प्रशंसा के लिए धन्‍यवाद।

Ramesh bajpai के द्वारा
September 15, 2010

आदरणीय श्री जोशी जी बहुत ही मजेदार रचना .रहा सवाल आपकी टी आर पीका तो वह तो यु ही बढ़ गयी . मजेदार पोस्ट की बधाई

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 15, 2010

    आदरणीय श्री बाजपेयी जी, सरहाना के लिए धन्‍यवाद पर आप जैसे लेखको का आर्शिवाद एवं साथ रहा तो हम भी कुछ बन जाऐंगे। और टी.आर.पी. तो आप ही बढ़ाएंगे।

R K KHURANA के द्वारा
September 15, 2010

प्रिय दीपक जी, सीधे शब्दों में करारा व्यंग पढने का मौका देने के लिए बधाई ! सुंदर व्यंग है ! निश्चय ही इससे आपकी TRP बढ़ गयी है ! खुराना

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 15, 2010

    प्रिय खुराना जी, पर यदि मै कहूं आदरणीय खुराना जी, तो गलत नही होगा। आप मुझसे उमर में बडें ही है मेरे यह बाल तो घूप में सफेद हुए है। सारी बातें यहां नही कहना चाहता हूं। आप हमारे अग्रणी है और हम तो आप के पीछे चलने वालों में से है और आप के प्रोत्‍साहन से ही आगे बढ़ने का मार्ग‍ मिलेगा। हमें इस परिवार (जागरण जंकशन) से जोड़ने में श्री अरविंद परिख जी का लेख सौहार्द क प्रतीक धार्मिक उत्‍सव ने मेरा मार्ग दर्शन किया है और एक दैवी कृपा है जो मुझे आगे से आगे लिखने को प्रोत्‍सा‍हित कर रही है। तहे दिल से आप को सादर धन्‍यवाद।

Piyush Pant के द्वारा
September 15, 2010

बहुत अच्छा सर ………… मजाक मजाक में ही आपने झूटी और सस्ती पत्रकारिता करने वालों पर अच्छा हाथ साफ़ किया……..

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 15, 2010

    प्रिय पियूष जी, सादर धन्‍यवाद आपका जो आपने इस पोस्‍ट को पढ़ा और इसे सराहा, यह विषय कई दिनों से दिमाग में ऊथल-पुथल मचा रहा था और आज यह बाहर आ ही गया। भविष्‍य में भी आपसे ऐसी ही आशा रखूंगा।

abodhbaalak के द्वारा
September 15, 2010

दीपक जी आप तो अपनी बातो को हास्य/व्यंग का रंग दे कर बहुत गहरी चोट कर जाते हैं. बहुत ही सुन्दर चोट की है आपने आजकी पत्रकारिता पर

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 15, 2010

    प्रिय अबोधबालक जी, आप का वस्‍तविक नाम तो नही जानता पर इतना तो अहसास हो रहा है आप इतने भी अबोध नहीं है जिस प्रकार से आप ने हमारी पोस्‍ट को तोला है। आप की सराहना के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

rkpandey के द्वारा
September 15, 2010

दीपक जी, टीआरपी के रंग पर आपने क्या खूब लिखा. पढ़ के बहुत अच्छा लगा. एक अच्छी रचना से रूबरू करवाने के लिए आभार.

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 15, 2010

    प्रिय पांडे जी, हौसला अफजाई के लिए आप का तहे दिल से शुक्रिया।

आर.एन. शाही के द्वारा
September 15, 2010

लीजिये दीपक जी आपकी टीआरपी का पहला वोट । आपके हल्के फ़ुल्के हास्य बहुत प्रभावित कर रहे हैं, और लेखन की शुद्धता भी … बधाई । आपने बात-बात में टीआरपी नामक रोग की सच्चाई भी बयान की है । धन्यवाद ।

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    September 15, 2010

    प्रिय शाही जी, आप के सब से पहले वोट के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद, और इस वोट को देख कर वाकई ऐसा लग रहा है कि मेरी टी.आर.पी अब जरूर बढ़ने लगेगी।


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