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भविष्‍यफल

Posted On: 12 Oct, 2010 Others में

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पाठकों आजकल भविष्‍यफल भी एक गर्म विषय है, भई इसके पीछे दुनिया दिवानी हुई जा रही है, जिसको दखो कर्म पर जोर न देकर भविष्‍य के बारे में ज्‍यादा सोचते हैं, आज कोई अखबार कोई मैग्‍जिन कोई भी टी.वी. चैनल यहां तक की इंटरनेट पर हर न्‍यूज पेपर की साईटें भी इस से अछुती नही रह पाईं है। टी.वी. के जाने माने न्‍यूज चैनल पर भी कही तीन देवियां, तो कही गणेश वाणी तो कही शनी वाणी। सभी ने भविष्‍यफल को अपनी साईट पर जरूर रखा है जिससे इन के चैनलों की टी.आर.पी. और रे‍टींग बढ़े।  

 

     भई आज जो भविष्‍यफल टी.वी. एवं अखबारों में दिया जा रहा है क्‍या वह सही है, यदि मान भी लें तो क्‍या यह सही है कि किसी एक राशी वालों के विषय में बताई गई बाते करोड़ों समान राशी वालों पर भी वही असर करेगी। भई हमें तो विशवास नहीं होता।

 

     मेरी जानकारी के हिसाब से चंद्रमा 2 से 2½ दिन तक एक राशी में रहता है तो एक राशी में जन्‍म लेने वाले लोग एक जैसे नहीं होते उनका भाग्‍य एक सा नहीं होता कोई जेल में तो कोई रेल में, कोई राजा तो कोई फकिर होता है। इसी तरह से एक लग्‍न एक राशी में लगभग 2 घण्‍टे तक रहता है।

 

     कई लोग बच्‍चे के पैदा होने के समय को ही सही जन्‍म समय मानते है पर गर्भ से निकलने के बाद बच्‍चे के पहले रोने को ही सही जन्‍म का समय माना जाता है (Time of first cry is the actual time of birth).

 

भविष्‍यफल इन्‍सान की जन्‍मकुंडली पर आधारित होता है। पर आज के परिपेक्ष में क्‍या हमारी जन्‍मकुंडली शत-प्रतिशत सही है। जन्‍मकुंडली गणना पर आधारित है और जब तक सही गणना या कहें जन्‍म का दिन एवं सही समय एवं पल की जानकारी नहीं होगी, जन्‍मकुण्‍डली सही परिणाम नही बता पाएगी।

 

भाई में इस विध्‍या पर कोई व्‍यंग नहीं कर रहा हूँ पर मात्र अपना पक्ष आप के सामने रख रहा हूं। यह मैं भी मानता हूँ यह एक विज्ञान है जो 100 प्रतिशत खरा है, पर आज के परिपेक्ष में यह विध्‍या हमें शत प्रतिशत रिजल्‍ट नही दे पा रही है कारण इस की भी कुछ सीमाएं है। भई औरों के विषय में मै नहीं कह सकता पर बचपन में मैने एक कथा सुनी थी और वह मेरे दिमाग मै पैठ कर गई, और जन्‍मकुण्‍डली की सच्‍चाई पर एक प्रश्‍नचिंह लगा गई।

 

कथा ऐसे है –

 

     पुराने समय मे एक देश के राजा के यहां उस की पत्नि गर्भ से थी और प्रसव का दौर आसपास ही था तो राजा ने अपने राजपुरोहित को बुलवा लिया और बोले के यह मेरी प्रथम संतान है इस की जन्‍मकुण्‍डली एक दम सही बननी चाहिए। राजा को इन जन्‍मकुण्‍डली एवं भविष्‍यफल आदि में बहुत अधिक आस्‍था थी। तो उन्‍होंने राजपुरोहित को बोला की जन्‍मकुण्‍डली बहुत ध्‍यान से बनानी है एक-एक पल एवं शर्ण में भी कमी या गल्‍ती नहीं होनी चाहिए तो आप ऐसा करें कि रानी निवास के बाहर दिवार के सहारे एक जगह विराजमान हो जाएं जैसे ही संतान के होने की खबर आएगी तो मै किसी दासी से कहुंगा की वह तुरंत एक पत्‍थर दिवार के इस पार फैक देगी और आप तुरंत गणना आदि कर उस बच्‍चे कि सही जन्‍मकुण्‍डली तैयार कर देना। पुरोहित जी को भी महाराज की योजना पसंद आ गई।

 

     अब आया बच्‍चे के जन्‍म का समय तो बच्‍चे के जन्‍म लेते ही दासी ने निदेशअनुसार बच्‍चे के जन्‍म लेते ही पत्‍थर दिवार के इस पार फेंक दिया। और पुरोहित जी ने जन्‍मकुण्‍डली तैयार कर दी।

 

     राजा ने जब पुरोहित से बच्‍चे के भविष्‍य के विषय में जानकारी मांगी तो, पुरोहित जी कुछ सकपका कर बोले यह बालक आप पर भारी है। राजा एक दम से चौंक गया और बोला क्‍या मतलब तो पुरोहित जी बोले कि कुण्‍डली के हिसाब से जब यह 18 वर्ष का होगा तो यह एक हाथी पर सवार होगा और वह हाथी आप को अपने पांव तले रोंद देगा।

 

     राजा यह सुन कर एक बार तो हिल गया, किन्‍तु अपने गुस्‍से पर नियंत्रण कर बोला पुरोहित जी आप ने सब कुछ सही सही देख लिया है क्‍या इस में यही सत्‍य है। पुरोहित हाथ जोड़ कर बोला महाराज मैने आप को सत्‍य से अवगत कराया है। मेरी विध्‍या यही कहती है। राजा को पुरोहित पर विशवास था, लेकिन वह चुप हो गया।

 

     समय बीता और बात आई गई हो गई राजा भी संतान के प्‍यार में सब कुछ भूल गया।

 

जब राजकुमार 18 वर्ष का हुआ और उस के जन्‍मदिन पर उसे हाथी पर बैठा कर सभा में लाया जा रहा था कि तभी हाथी ने महावत को गिरा दिया और बेकाबू हो सभा की ओर भाग निकला। राजकुमार पालकी में बैठे थे वह स्‍वंय को बचाते रहे। सभा में अफरा-तफरी मच गई सभी मेहमान इधर उधर भागने लगे, हाथी बेकाबू हो राजा की ओर लपका, राजा अपनी जान बचा इधर उधर भाग रहे थे, अचानक ठोकर लगी और वह गिर गए, और उन के सिर पर हाथी ने अपना अगला पांव रख दिया परंतु अचानक राजा ने पल्टी मारी और वह हाथी के पांव के नीचे से निकल गए।  और इस तरह मौत को धौका देकर राजा जीवित बच गए।

 

     इस घटना के बाद राजा ने तुरंत ही राजपुरोहित को बुलवा भेजा, उनके दिमाग में पुरोहित की जन्‍मकुण्‍डली वाली बात कौंध गई, पुरोहि के आते ही राजा ने सवाल किया कि पुरोहित जी आप की विध्‍या गल्‍त साबित हो गई आप अपने कार्य में फेल हो गए, जो आप ने भविष्‍यवाणी की थी वह गलत हो गई।  इस पर पुरोहित जी बोले राजन, ऐसा नहीं है, यह जन्‍मकुण्‍डली एक विज्ञान है, एक गणना है जो वर्षों से हमारे देश एवं विदेशों में प्रचलित है। यह कभी गलत नहीं हो सकती।

 

     राजा बोले तुम ही ने राजकुमार की जन्‍मकुण्‍डली बनाई थी और कहा था की जब वह 18 वर्ष का होगा तो वह जिस हाथी पर बैठा होगा, उस हाथी के पांव के नीचे मेरा सर कुचल जाऐगा। पर देखो आज मै जीवित हूं और तुम्‍हारी कुण्‍डली गलत हुई।

 

     पुरोहित जी बोले, राजन यह गणना है यह गलत हो ही नहीं सकती केवल समय के कुछ पलों का हेरफेर है। मैने अपने हिसाब से कुण्‍डली सही ही बनाई थी और वह सभी कुछ सही दर्शा रही है कि राजकुमार हाथी पर होगा और वही हाथी आप की हत्‍या का कारण होगा, परन्‍तु आप बच जाते है, यह कुण्‍डली में समय के कुछ पल आगे होने के कारण हुआ।

 

     राजा बोले, तुम्‍हें तो तुरंत ही संतान के होने की खबर मिल गई थी फिर यह समय का हेरफेर कैसे। तो पुरोहित जी बोले, महाराज, बच्‍चे के जन्‍म के पल – दासी दौड़ कर दीवार तक आने के पल – एवं पत्‍थर के दीवार के पार फैकने और उस को मेर पास तक पहुंचने के पलों में ही भविष्‍य फल में संभावनाएं बदल जाती है। तो इसी कारण वह कुण्‍डली में भी उन संभावनाओं को बदल देती है जिसे पढ़ पाना किसी के बस की बात नहीं।

 

     यही बात आज के परिपेक्ष में भी लागू होती है, बच्‍चे के जन्‍म का समय जो डॉक्‍टर ने लिख दिय हम उसे ही सही मानते है, पर यह सही नही है। कई बार आस्‍पताल में एक साथ कई बच्‍चों का जन्‍म हो रहा होता है डॉक्‍टर जब खाली होता है तब वह बैठ कर बच्‍चे का फार्म भरता है और जन्‍म का समय अंदाज से भर देता है। क्‍या यह संभव नहीं की डॉक्‍टर की घड़ी 5 मिनट आगे या 5 मिनट पीछे भी हो सकती है। यही कारण है जन्‍मकुण्‍डली से सटीक परिणाम नहीं मिल पाते।

 

     तो पाठकों यह तो मेरा विचार एवं मेरी सोच है, आप लोग क्‍या सोचते है कृपया अपनी राय दें।

 

-दीपक जोशी



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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

priyasingh के द्वारा
October 19, 2010

भविष्यफल तो मै भी पढ़ती हूँ पर हाँ इस पर आँख मूंद कर विश्वास बिलकुल भी नही करती ……….. वो राजा की कहानी पढ़कर हो सकता है की कुछ लोगो की आँखों पर से अंधविश्वास का पर्दा हटे….. आपके सारे ब्लॉग पढ़े…….. सभी के सभी पठनीय थे …………

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    October 20, 2010

    प्रिया जी, प्रतिक्रिया देने के लिए धन्‍यवाद और साथ ही मेरे अन्‍य ब्‍लाग भी आप को पठनीय लगे इस के लिए एक बार पुन: धन्‍यवाद। http://deepakjoshi63.jagranjunction.com

Ramesh bajpai के द्वारा
October 14, 2010

आदरणीय श्री जोशी जी क्षमा चाहता हु बिलम्ब के लिए . नेट की गति इतनी धीमी है एक पोस्ट से दूसरी में जाते जाते टाइम बहुत लग जाता है देरी की वजह से मुझे फल मिला तो …………….. अगली बार देरी वालो के लिए पहले से व्यवस्था कर लीजिये गा तब तक मै आदरणीय श्री शाही जी से कुछ गुजारिस करता हु धन्यवाद

    deepak joshi के द्वारा
    October 15, 2010

    आदरणीय बाजपेयी जी, जो अपने होते है या शुभचिन्‍तक उनका तो हम बुरा ही नही मानते, आप केवल नाम भी लिख देते तो हमे अहसास हो जाता की आप ने हमारी पोस्‍ट पढ़ ली है। अब यह नए जमाने की नई चीज है तंग तो करेगी। पहले हम पजामा पहनते थे अब टाईट पैंट तो भाई साहब पुरानी रित छोड कर नई को अपनाओगे तो वह तंग (बैठने में तंग) तो करेगी ही। -दीपक जोशी

NIKHIL PANDEY के द्वारा
October 13, 2010

आदरणीय जोशी जी वैसे तो इस विषय पर मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है.. मगर ये जानता हु की फलित ज्योतिष एक प्रकार का उन्नत विज्ञानं है ..जिसमे समय और स्थान ,दिशा का बहुत महत्व होता है … और उसके आधार पर सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है ….सबकुछ समय पर निर्भर होता है… मेरा विचार है इंसान को जीवन में सहज आचरण करना चाहिए.. सारी चीजे समय के साथ स्वयं होती जाती है.. विश्वाशी होना चाहिए अंध विश्वाशी नहीं… विषय तो बहुत नया सा उठाया है आपने .. भाई जी से मुलाकात का बढ़िया असर हुआ …

    deepak joshi के द्वारा
    October 14, 2010

    प्रिय निखिल जी, बहुत ही सही कहा है आप ने इंसान को विशवासी होना चाहिए अंध विशवासी नहीं और कर्म पर अधिक ध्‍यान देना चाहिए। प्रतिक्रिया के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 13, 2010

आदरनीय जोशी जी सादर प्रणाम,आपका यह ज्योतिष के ऊपर अति सुन्दर लेख और उसके साथ ही आदरनीय शाही जी का इतना जबरदस्त प्रतिक्रिया,मै इस पर आप लोंगो के समछ कुछ कहूँ तो ये मेरी गुस्ताखी होगी,लेकिन फिर जहाँ तक मै समझता हूँ यह विद्या बिलकुल ही सटीक और सही है अगर इसको सही से केल्कुलेट करके कुछ कहा जाय तो! जैसा की आपने अपने लेख में भी जिक्र किया है की यह गडित पर आधारित है……………………. बशर्ते आज इस समाज में इस विद्या की जानकारी रखने वाले और भविष्य वाणी करने वाले इसके हकीकत में जानकर हों,आज देखा जाता है की कर्मकांड करने वाले पंडित भी भविष्य वाणी करते हैं भले ही वो इस विद्या को जानते हों या नहीं, अब चुकी लोगो की ज्योतिष में आस्था है तो लोग इनसे भी पूछ इनके बातों पर विश्वाश कर बैठते हैं जबकि कर्मकांड और ज्योतिष दोनों अलग अलग छेत्र है!आज कुछ लोग इस विद्या के बारे में आधी से भी कम जानकारी रख पैसा कमाने के चक्कर में सिर्फ लोगों भ्रमित करने के साथ साथ इस विद्या की भी धज्जियाँ उड़ाते फिर रहे है,जबकि मेरे हिसाब से कुछ हद तक सही भविष्य बाणी वही ब्यक्ति कर सकता है जो इस विद्या की गहन जानकारी रखते हुए साथ में इश्वर की शाधना कर कुछ शक्ति भी अर्जित किया हो,तथा इन्शान की सही कुंडली हो जिसके लिए इन्शान का जन्म समय,जन्म स्थान और जन्म तारीख बिलकुल ही सही होना चाहिए !यहाँ पर एक बात और कहना चाहूँगा जहाँ तक मुझे जानकारी है की किसी भी इन्शान पर उसकी अपनी कुंडली के साथ साथ उसके परिवार के अन्य सदस्यों के भी कुंडली का कुछ आंशिक प्रभाव पड़ता है………….जैसे इस कहानी में यह भी हो सकता है की राजकुमार के कुंडली के हिसाब से राजा का सर हाथी के पाव के द्वारा कुचला जाना चहिये था लेकिन राजा बच गए,संभव यह भी है की राजा की कुंडली में आगे जीवन हो या फिर उनकी पत्नी की कुंडली में उनका सुहाग का पछ बेटे की कुंडली से जयादा मजबूत हो,सो राजा को उनके बेटे की कुंडली द्वारा अरिष्ट से उनकी पत्नी के सुहाग वाले पछ ने बचा लिया हो! और रहा सवाल भाग्य और कर्म का तो सर मै कर्म से ऊपर भाग्य को मानता हूँ क्योंकि मेरे हिसाब से मनुष्य द्वारा वही कर्म किया जाता है जो उसके भाग्य में होता है………………गुस्ताखी माफ़ कीजियेगा सर मैंने इतना लम्बा भासन कह डाला,धन्यवाद!

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    October 13, 2010

    प्रिय धर्मेश जी, आप का बहुत बहुत धन्‍यवाद जो आप ने इतने विस्‍तार से मेरे लेख के विषय में अपने विचार प्रकट किए। मैं आप के विचार से पुर्ण रूपेण सहमत हूं कि – इन्‍सान पर उसकी अपनी कुंडली के साथ साथ उसके परिवार के अन्य सदस्यों के भी कुंडली का कुछ आंशिक प्रभाव पड़ता है……। साथ में पुजा पाठ का भी बहुत प्रभाव पड़ता है। जैसे यदि पति की कुंडली में कुछ दोष है और पत्‍नी किसी देव की अराधना करती है तो उस देवता के प्रताप/आर्शिवाद का फल पति को मिल जाता है। -दीपकजोशी63

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
October 13, 2010

प्रिय डेनियल जी, मै किसी की श्रद्धा को चोट नही पहुंचाना चाहता हूं मैने सिर्फ अपने विचार रखे है। हर व्‍यक्ति की अपनी सोच है व अपने विचार होते है। भई इस राशिफल के रसास्‍वादन से तो हम भी अछुते नहीं है स्‍वाद-स्‍वाद में हम भी इस अम़ृत को थोड़ा सा चख लेते है। कभी-कभी रविवार के अखबार में आए साप्‍ताहिक राशिफल/भविष्‍यफल को पढ़ने के अपने कोतुहल को त्‍याग नही पाते। पर वह एक श्रणिक मात्र ही होता है और रोज की भाग दौड़, यानि कर्म के कारण उस का प्रभाव लुप्‍त हो जाता है। श्रधेय शाही जी ने सही ही कहा है यह हमारे कर्मो से ज्‍यादा जुड़ा है और हमार कर्म ही इसे अपने पक्ष या विपक्ष की ओर मोडता है। प्रतिक्रिया का लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद।

roshni के द्वारा
October 12, 2010

दीपक जी भविष्य के बारे में क्या कहे .. वैसे जिस दिन मेरा राशिफल अच्छा आता है मै मान लेती हूँ और जिस दिन ख़राब आता है तो कहती हूँ ये झूठ है ये झूठ है …… बस वोह सच में झूठ ही निकलता है .. बस मै तो भाविस्य्फल के बारे में इतना ही जानते हूँ .. मगर कहानी बड़ी अच्छी थी … धन्यवाद सहित

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    October 13, 2010

    रोशनी जी, प्रणाम, मै भी आप की बात से कही हद तक सहमत हूं क्‍योंकि यदि टी.वी पर राशिफलों के विषय में बताया जाता है तो हम भी कोतुहल वश उसे सनने के लिए एक बार तो बाध्‍य हो ही जाते है और उस का संबध अभी हाल ही में हमारे साथ घटित हुई कुछ बातों या घटनाओं से मेल खाता है तो हम सोचते है यह सही है। यह चार लाईनो का राशिफल एक श्रणिक सुकुन से दे जाता है जैसा सुकुन एक अच्‍छा चुटकुला सुन कर होता है और वह बाद में मानसपटल से लुप्‍त हो जाता है। वही छाप यह राशिफल हमारे मानस पर छोड़ जाते है। प्रतिक्रिया देने के लिए धन्‍यवाद

daniel के द्वारा
October 12, 2010

आदरणीय दीपक जी ! आपके इस लेख से यदि वे लोग, जो सदैव ही राशिफल के चक्कर में पड़े रहते हैं, कुछ शिक्षा ले लें तो कितना अच्छा हो !

nishamittal के द्वारा
October 12, 2010

दीपक जी, जैसा कि आपने स्वयं ही लिखा है,ज्योतिष गणनाओं पर आधारित एक विज्ञानं है.परन्तु जिस प्रकार आज हर चेनल अपनी टी आर पी बढ़ाने के लिए उसको उपहास का विषय बना रहे हैं मेरे विचार से इससे विद्या का अपमान ही होता है.

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    October 13, 2010

    निशा जी, प्रणाम, आपने धर्मेंद्र एवं शर्मिला टेगोर की फिल्‍म चुपके-चुपके देखी हो तो डेविड धवन जी की बात याद आ जाएगी कि विद्या एवं भाषा अपने में इतनी महान होती है कि उस का उपहास करना स्‍वंय का उपहास करना होता है। आज के समय में लोग इतने ज्ञानि हो गए है कि उनके पास अपनी बात कहने के लिए हर तरह के तर्क एवं वितर्क मौजुद है। बात भी सही है। एक मां की कोख से उत्‍पन्‍न चार बच्‍चों के स्‍वभाव एक से नही होंगे। सभी का स्‍वभाव अलग होगा। उसी तरह भविष्‍फल/राशिफल अपने में एक विद्या तो है पर उस की व्‍याख्‍या कौन किस तरह कर रहा है वह उस की श्रद्धा एवं आस्‍था पर निर्भर करता है। प्रतिक्रिया देने के लिए धन्‍यवाद। -दीपकजोशी63

आर.एन. शाही के द्वारा
October 12, 2010

प्रिय भाई दीपक जी, इस बार आपने काफ़ी विवादास्पद विषय का चुनाव किया है । व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि ज्योतिष शुद्ध रूप से गणित पर आधारित विज्ञान है, और भविष्य की खगोलीय, भौतिक तथा भौगोलिक घटनाओं का आभास अपनी गणना के माध्यम से दे सकता है, मानवीय जीवन की घटनाओं का नहीं । मानवीय जीवन के एक मिनट आगे की भी घटनाएं मात्र कर्मफ़ल और संयोग पर आधारित होती हैं, जिसका और कोई गणित नहीं होता । अमावस्या तथा पूर्णिमा के दिन जैसे चंद्रकलाओं के चुम्बकीय प्रभाव से समुद्र के जल में उथल-पुथल (ज्वार-भाटा) होती है, कुछ वैसा ही प्रभाव मानव शरीर के रक्त संचार पर भी पड़ता है, क्योंकि रक्त भी द्रव है । ऐसी ही बहुत सारी वैज्ञानिक और खगोलीय गतिविधियों से हमारा जीवन प्रभावित होता रहता है, जो मात्र वैज्ञानिक तथ्य है । आगे फ़िर लिखना पड़ेगा पावर कट हो गया है ।

    आर.एन. शाही के द्वारा
    October 12, 2010

    तो मैं अपना विचार बता रहा था दीपक भाई कि हमारे आगे जो भी घटित होता है, वह सिर्फ़ हमारा कर्मफ़ल होता है । जैसे मैंने आपको गंजा लिखा तो यह मेरा एक कर्म हुआ । उस क्रिया (कर्म) की प्रतिक्रिया में आपने मुझे शैतान बना दिया, अर्थात मेरे कर्म का फ़ल प्राप्त हो गया । यही घटित होता है हमारे जीवन में, भविष्यफ़ल का कोई ज्योतिष नहीं होता । हां, हमारे कर्मों के आधार परिस्थिति, परिवेश और संस्कारमूलक होते हैं, तदनुरूप ही फ़ल भी मिलते हैं । कोई सपेरे का कर्म करता है तो कभी न कभी उसे सर्पदंश झेलना ही होगा । फ़िर उपचार का कर्म कर वह स्वस्थ भी हो जाता है, क्योंकि उसके पास उस कर्म का ज्ञान है । जो उपचार नहीं जानेगा, वह सर्पदंश से मृत्यु को प्राप्त होगा । सब कर्मों का खेल है, अज्ञानतावश हम कर्म करने की कलाओं को डेवलप नहीं कर पाते, जो कर लेता है, वह सुखी होता है । साधुवाद! प्रवचन थोड़ा लम्बा हो गया ।

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    October 13, 2010

    आदरणीय शाही जी, प्रणाम, आप की प्रतिक्रिया ने तो मेरे लेख की कुछ टुटी हुई कडि़यों को जोड़ने में एक सेतु का काम किया है। शायद इसकी व्‍याख्‍या करने के लिए अभी मुझे बहुत कुछ सिखना पड़ेगा उसका कारण है कि हम इस अध्‍यात्‍म रूपी तरणी के नए तैराक है खड़े होकर चलना सिख रहे है तैर कर इस की धारा तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। आप की प्रतिक्रिया पर मै कुछ भी कहने में अस्‍मर्थ हूं। धन्‍यवाद

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    October 13, 2010

    आदरणीय शाही जी, सुबह जल्‍दी में जवाब अधुरा रह गया था, और मै सारा दिन सोचता रहा की शाही जी कई दिनों से इस ताक में थे की वह किसी न किसी बहाने से मुझे गंजा कहने की सोच रहे है पर उन्‍हें मौका नहीं मिल पा रहा पर आज आप ने बातों में उलझा कर कह ही दिया। भाई साहब बॉल्‍ड इज ब्‍यूटीफूल।

Anita Paul के द्वारा
October 12, 2010

जोशी जी, हालांकि मैं ज्योतिष तो नहीं मानती लेकिन कभी-कभी मुझे भी इस विद्या पे विश्वास हुआ है. जहॉ तक मेरा मानना है कि अगर सही ढ़ंग से इस विधा का यूज किया जाए तो भविष्य़ की कई बातें ज्ञात हो सकती हैं.

    दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
    October 12, 2010

    अनिता जी, प्रतिक्रिया देने के लिए धन्‍यवाद, यह विद्या पुर्ण रूप से गणित पर आधारित एक भी अंक से बात का मतलब बदल जाता है। मै तो ऐसे लोगो से भी मिला हूं जो फोटो को देख कर उस व्‍यक्ति की जन्‍मकुण्‍डली बना देता है और आप के भूत काल का पूरा लेखा निकाल देगा पर फिर बात आती है भविष्‍य के बारे में तो वह सटीक नहीं होंती।


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